आशिक का कत्ल (भाग-1)
रात का वक्त था. पूरा गांव रात की अंधेरी परत में गहरी नींद सोया था. रात के सन्नाटे को चिरती हुई कभीकभी कुत्तों की आवाज सुनाई दे जाती थी. अंधेरे में एक शख्स धीरेधीरे कदमों से एक मकान की ओर बढ़ रहा था. वह चोरों की तरह मकान के पीछे की ओर गया. वहां उसने खिड़की पर हल्की-सी आवाज की. अंदर कोई आवाज का इंतजार कर रहा था. आवाज के आते ही खिड़की तुरंत खुल गई. वह शख्स खिड़की के रास्ते अंदर चला गया. वहां एक खूबसूरत औरत चुपचाप एक कोने में मुंह फुलाए खड़ी थी. अंदर आने वाले शख्स ने उससे लिपटने की कोशिश की. लड़की तुनक कर उससे दूर हट गई. ‘‘जाओ, हम तुमसे नहीं बोलते.’’ ‘‘क्यों इतनी भी क्या नाराजगी हमसे.... हम भी तो सुने हमारी जान को क्या हो गया है.’’ उस शख्स ने फिर से महिला को अपने आगोश में लेने के लिए हाथ बढ़ाया, वह फिर दूर हटते हुए बोली, ‘‘आज तुमने फिर मुझ को तड़पाया. जानते हो कितनी देर कर दी तुमने.... पूरे 20 मिनट लेट.... तुमको क्या पता हमारे लिए एकएक पल काटना मुश्किल हो जाता है, ड्राइवर बाबू.’’ ‘‘लोगों की नज़रें बचा कर मुझे यहां आना होता है. तुम तो जानती हो ना.... अगर इस राज को जमाना जान जाएगा तो कोई हम...